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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 48 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 4

6.48.4

Mantra ID: 6.48.4

म॒हो दे॒वान्यज॑सि॒ यक्ष्या॑नु॒षक्तव॒ क्रत्वो॒त दं॒सना॑ । अ॒र्वाचः॑ सीं कृणुह्य॒ग्नेऽव॑से॒ रास्व॒ वाजो॒त वं॑स्व ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.48.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम महान्‌ देवों का यज्ञ करने वाले हो, इसलिए हमारे यज्ञ में भी देवों की सतत पूजा करो तथा हमारी रक्षा के लिए देवों को हमारे सामने लाओ. तुम हमें हव्य अन्न दो एवं हमारा दिया हुआ हव्य स्वीकार करो. (४)

EN English Translation

O agni! You are the ones who perform the yajna of the great gods, so worship the gods continuously even in our yajna and bring the gods before us to protect us. You give us the good food and accept the gift given to us. (4)

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