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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 49 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 7

6.49.7

Mantra ID: 6.49.7

पावी॑रवी क॒न्या॑ चि॒त्रायुः॒ सर॑स्वती वी॒रप॑त्नी॒ धियं॑ धात् । ग्नाभि॒रच्छि॑द्रं शर॒णं स॒जोषा॑ दुरा॒धर्षं॑ गृण॒ते शर्म॑ यंसत् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.49.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पवित्र बनाने वाली, विचित्र रूपवाली, विचित्र गतिवाली एवं वीर-पत्नी सरस्वती हमारे यज्ञरूप कर्म को पूरा करे. वह देवपत्नियों के साथ प्रसन्न होकर स्तोता को दोषरहित तथा ठंड एवं हवा की गति से रहित घर एवं सुख दे. (७)

EN English Translation

May saraswati, the holy one, the strange-looking, the strange-moving and the heroic wife, complete our yajna-roop karma. He pleased with the devas and wives and give the hymn a house and happiness, free from faultless and without the speed of cold and wind. (7)

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