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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 49 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 8

6.49.8

Mantra ID: 6.49.8

प॒थस्प॑थः॒ परि॑पतिं वच॒स्या कामे॑न कृ॒तो अ॒भ्या॑नळ॒र्कम् । स नो॑ रासच्छु॒रुध॑श्च॒न्द्राग्रा॒ धियं॑धियं सीषधाति॒ प्र पू॒षा ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.49.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अभिलषित फल पाकर वश में होने वाला स्तोता सभी मार्गो के स्वामी एवं पूजनीय सूर्य के सामने स्तुतियों सहित उपस्थित हो. पूषा हमें सोने के सींग वाली गाएं दें एवं हमारे सभी कामों को पूरा करें. (८)

EN English Translation

The hymn, which is subdued by the desired fruit, should be present with praises before the lord of all the paths and the revered sun. Let Pusha sing us with a gold horn and complete all our work. (8)

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