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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 55 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 4

6.55.4

Mantra ID: 6.55.4

पू॒षणं॒ न्व१॒॑जाश्व॒मुप॑ स्तोषाम वा॒जिन॑म् । स्वसु॒र्यो जा॒र उ॒च्यते॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.55.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम बकरेरूपी घोड़ों वाले एवं अन्नस्वामी पूषा की स्तुति करते हैं. वे अपनी बहिन उषा के प्रेमी कहलाते हैं. (४)

EN English Translation

We praise the goat-like-horse and annaswami pusha. He is called the lover of his sister Usha. (4)

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