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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 55 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 55 • ऋचा / मन्त्र 5

6.55.5

Mantra ID: 6.55.5

मा॒तुर्दि॑धि॒षुम॑ब्रवं॒ स्वसु॑र्जा॒रः श‍ृ॑णोतु नः । भ्रातेन्द्र॑स्य॒ सखा॒ मम॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.55.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम मातारूप रात्रि के पति पूषा की स्तुति करते हैं. वे अपनी बहिन उषा के प्रेमी सूर्य से हमारी स्तुति सुनें. इंद्र के भाई पूषा हमारे मित्र हों. (५)

EN English Translation

We praise Pooja, the husband of Matarupa Raat. They hear our praise from their sister Usha's lover Surya. Indra's brother Pusha be our friend. (5)

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