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7.24.3
आ नो॑ दि॒व आ पृ॑थि॒व्या ऋ॑जीषिन्नि॒दं ब॒र्हिः सो॑म॒पेया॑य याहि । वह॑न्तु त्वा॒ हर॑यो म॒द्र्य॑ञ्चमाङ्गू॒षमच्छा॑ त॒वसं॒ मदा॑य ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.24.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे ऋजीषी इंद्र! हमारे इस यज्ञ में सोमरस पीने के लिए स्वर्ग एवं अंतरिक्ष से आओ. हरि नामक अश्च तुम्हें हमारे सामने प्रसन्नता के लिए स्तुतियों की ओर वहन करें. (३)
EN English Translation
O Sage Indra! Come from heaven and space to drink somras in this yagna of ours. Let us bear the praises of the assh named Hari to you for the pleasure before us. (3)