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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 62 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 62 • ऋचा / मन्त्र 4

7.62.4

Mantra ID: 7.62.4

द्यावा॑भूमी अदिते॒ त्रासी॑थां नो॒ ये वां॑ ज॒ज्ञुः सु॒जनि॑मान ऋष्वे । मा हेळे॑ भूम॒ वरु॑णस्य वा॒योर्मा मि॒त्रस्य॑ प्रि॒यत॑मस्य नृ॒णाम् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.62.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अखंडनीय एवं महती द्यावा-पृथिवी! हम सुंदर जन्म वाले तुम्हें जानते हैं. तुम हमारी रक्षा करो. हम वरुण, वायु एवं मानवों के प्रिय मित्र के क्रोध के पात्र न बनें. (४)

EN English Translation

It is incomparable and important- earthy! We know you with beautiful births. You protect us. Let us not be the rage of Varuna, the air and the beloved friend of human beings. (4)

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