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7.62.5
प्र बा॒हवा॑ सिसृतं जी॒वसे॑ न॒ आ नो॒ गव्यू॑तिमुक्षतं घृ॒तेन॑ । आ नो॒ जने॑ श्रवयतं युवाना श्रु॒तं मे॑ मित्रावरुणा॒ हवे॒मा ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 7.62.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे मित्र व वरुण! अपनी भुजाएं फैलाओ एवं हमारे जीवन के लिए उस भूमि को जल से सींचो, जिस पर हमारी गाएं चलती हैं. तुम हमें मनुष्यों में प्रसिद्ध बनाओ. हे नित्य तरुणो! हमारी पुकार सुनो. (५)
EN English Translation
Oh my friend and Varun! Stretch out your arms and water the land on which our cows run for our lives. You make us famous among humans. These young men! Listen to our call. (5)