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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 68 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 68 • ऋचा / मन्त्र 4

7.68.4

Mantra ID: 7.68.4

अ॒यं ह॒ यद्वां॑ देव॒या उ॒ अद्रि॑रू॒र्ध्वो विव॑क्ति सोम॒सुद्यु॒वभ्या॑म् । आ व॒ल्गू विप्रो॑ ववृतीत ह॒व्यैः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.68.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सुंदर अश्चिनीकुमारो! तुम्हारी अभिलाषा से सोमलता कूटने वाला पत्थर ऊंचा शब्द करता है, उस समय मेधावी ऋत्विजू तुम्हें हव्यों द्वारा आकर्षित करता है. (४)

EN English Translation

O beautiful ashchinikumaro! The stone that is somatic with your desire makes the word high, at that time the brilliant Ritwizu attracts you with the havyas. (4)

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