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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 68 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 68 • ऋचा / मन्त्र 5

7.68.5

Mantra ID: 7.68.5

चि॒त्रं ह॒ यद्वां॒ भोज॑नं॒ न्वस्ति॒ न्यत्र॑ये॒ महि॑ष्वन्तं युयोतम् । यो वा॑मो॒मानं॒ दध॑ते प्रि॒यः सन् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.68.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा जो विचित्र धन है, उसे हमें दो. जो तुम्हारे प्रिय हैं एवं तुम्हारा दिया हुआ धन धारण करते हैं, उन अत्रि ऋषि से महिष्वत को अलग करो. (५)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! Give us the strangest wealth that you have. Separate Mahishvat from the sage Atri who is dear to you and hold the wealth you have given. (5)

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