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ऋग्वेद

Mandal 7 • Sukta 69 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 7 • सूक्त 69 • ऋचा / मन्त्र 5

7.69.5

Mantra ID: 7.69.5

यो ह॒ स्य वां॑ रथिरा॒ वस्त॑ उ॒स्रा रथो॑ युजा॒नः प॑रि॒याति॑ व॒र्तिः । तेन॑ नः॒ शं योरु॒षसो॒ व्यु॑ष्टौ॒ न्य॑श्विना वहतं य॒ज्ञे अ॒स्मिन् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 7.69.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रथस्वामी अश्विनीकुमारो! तुम्हारा रथ तेजों को ढकता हुआ घोड़ों की सहायता से मार्ग में चलता है. हे अश्विनीकुमारो! उषाकाल होने पर हमारे पापों के शमन एवं सुखों की प्राप्ति के लिए उस रथ द्वारा हमारे यज्ञ में आओ. (५)

EN English Translation

O Charioteeswami Ashwinikumaro! Your chariot walks along the path with the help of horses covering the radiances. O Ashwinikumaro! When it is morning, come to our yagna by that chariot for the mitigation of our sins and to attain happiness. (5)

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