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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 32 • Mantra / Rik 21

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 21

8.32.21

Mantra ID: 8.32.21

अती॑हि मन्युषा॒विणं॑ सुषु॒वांस॑मु॒पार॑णे । इ॒मं रा॒तं सु॒तं पि॑ब ॥ (२१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.32.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! क्रोध के साथ एवं बुरे स्थान में सोमरस निचोड़ने वाले को लांघकर चले जाओ. हमारे द्वारा दिए हुए इस सोमरस को पिओ. (२१)

EN English Translation

O Indra! With anger and in the bad place, push the somers squeezer and go away. Drink this somras given by us. (21)

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