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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 41

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 41

8.45.41

Mantra ID: 8.45.41

यद्वी॒ळावि॑न्द्र॒ यत्स्थि॒रे यत्पर्शा॑ने॒ परा॑भृतम् । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥ (४१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.41 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने जो अभिलषणीय धन दृढ़-स्थान, स्थिर-स्थान व संदिग्ध-स्थान में रखा है, वह हमारे लिए लाओ. (४१)

EN English Translation

O Indra! Bring us the money you have kept in the fortified space, the fixed place and the suspicious place. (41)

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