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8.45.42
यस्य॑ ते वि॒श्वमा॑नुषो॒ भूरे॑र्द॒त्तस्य॒ वेद॑ति । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥ (४२)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.42 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! तुम्हारे द्वारा दिया हुआ जो धन सब मनुष्य जानते हैं, उस अभिलषणीय धन को हमारे पास लाओ. (४२)
EN English Translation
O Indra! Bring to us the wealth that you have given to us that all men know. (42)