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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 46 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 10

8.46.10

Mantra ID: 8.46.10

ग॒व्यो षु णो॒ यथा॑ पु॒राश्व॒योत र॑थ॒या । व॒रि॒व॒स्य म॑हामह ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.46.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे महाधन वाले इंद्र! हमारे मन में पहले जिस प्रकार गाय, अश्व एवं रथ की अभिलाषा होने पर तुमने उसे पूरा किया था, उसी प्रकार हमें अब भी देना है. (१०)

EN English Translation

O Indra of the Great Wealth! Just as you fulfilled the desire of the cow, horse and chariot in our minds earlier, we still have to give it. (10)

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