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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 49 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 15

8.49.15

Mantra ID: 8.49.15

शेषे॒ वने॑षु मा॒त्रोः सं त्वा॒ मर्ता॑स इन्धते । अत॑न्द्रो ह॒व्या व॑हसि हवि॒ष्कृत॒ आदिद्दे॒वेषु॑ राजसि ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.49.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! अरणियां तुम्हारी माताएं हैं. उनके भीतर रहकर तुम वनों में सोते हो. मनुष्य तुम्हें भली प्रकार जलाते हैं. तुम आलस्यरहित होकर हव्यदाता यजमान के कल्याण के लिए देवों को पास ले आओ तथा उनके बीच सुशोभित बनो. (१५)

EN English Translation

O agni! Arans are your mothers. Living within them, you sleep in the forests. Humans burn you well. Be lazy and bring the gods to the gods for the welfare of the faithful host and be adorned among them. (15)

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