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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 59 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 59 • ऋचा / मन्त्र 2

8.59.2

Mantra ID: 8.59.2

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ । हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.59.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे पुरुहन्मा ऋषि! तुम अपनी रक्षा के लिए इंद्र को अलंकृत करो. तुम्हारे विधाता इंद्र का स्वभाव उग्र एवं कोमल दो प्रकार का है. इंद्र अपने हाथ में दर्शनीय एवं आकाश में सूर्य के समान दिखाई देने वाला वज्र धारण करते हैं. (२)

EN English Translation

O Sage Puruhanma! You embellish Indra for your protection. The nature of your vidhata Indra is of two types, fierce and gentle. Indra holds a thunderbolt visible in his hand and looks like the sun in the sky. (2)

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