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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 62 • Mantra / Rik 18

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 62 • ऋचा / मन्त्र 18

8.62.18

Mantra ID: 8.62.18

पुरं॒ न धृ॑ष्ण॒वा रु॑ज कृ॒ष्णया॑ बाधि॒तो वि॒शा । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मवः॑ ॥ (१८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.62.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शत्रुओं को दबाने वाले ऋषि सप्तर्वध्रि! तुम काले संदूक में बंद थे. बाद में अश्विनीकुमारों की कृपा से तुमने बाहर निकल कर उसे जला दिया था. अश्विनीकुमारों की रक्षा हमारे पास रहे. (१८)

EN English Translation

O sage Saptarvadhri who suppresses enemies! You were locked in the black ark. Later, by the grace of the Ashwinikumars, you went out and burned it. The defence of the Ashwinikumars remained with us. (18)

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