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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 1

8.85.1

Mantra ID: 8.85.1

अ॒स्मा उ॒षास॒ आति॑रन्त॒ याम॒मिन्द्रा॑य॒ नक्त॒मूर्म्याः॑ सु॒वाचः॑ । अ॒स्मा आपो॑ मा॒तरः॑ स॒प्त त॑स्थु॒र्नृभ्य॒स्तरा॑य॒ सिन्ध॑वः सुपा॒राः ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.85.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र से डरी हुई उषाएं अपनी गति बढ़ाती रहती हैं. इंद्र के कारण ही सब रात्रियां निशांत में शोभनवाक्यों वाली बनती हैं. इंद्र के कारण ही सात नदियां मानव हितकारिणी एवं सरलता से पार होने योग्य रहती हैं. (१)

EN English Translation

Usha, who is afraid of Indra, keeps increasing their speed. It is because of Indra that all the nights become adorned in Nishant. It is because of Indra that the seven rivers are able to cross with human benefit and ease. (1)

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