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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 85 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 85 • ऋचा / मन्त्र 2

8.85.2

Mantra ID: 8.85.2

अति॑विद्धा विथु॒रेणा॑ चि॒दस्त्रा॒ त्रिः स॒प्त सानु॒ संहि॑ता गिरी॒णाम् । न तद्दे॒वो न मर्त्य॑स्तुतुर्या॒द्यानि॒ प्रवृ॑द्धो वृष॒भश्च॒कार॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.85.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने बिना किसी की सहायता से अपने वज्र द्वारा इक्कीस पर्वतशुंगों को तोड़ा था. अभिलाषापूरक इंद्र ने जो काम किए हैं, उन्हें न देव कर सकते हैं और न मानव. (२)

EN English Translation

Indra had broken twenty-one mountain peaks by his thunderbolt without anyone's help. Neither God nor human beings can do the work that Indra has done. (2)

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