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8.85.16
त्वं ह॒ त्यत्स॒प्तभ्यो॒ जाय॑मानोऽश॒त्रुभ्यो॑ अभवः॒ शत्रु॑रिन्द्र । गू॒ळ्हे द्यावा॑पृथि॒वी अन्व॑विन्दो विभु॒मद्भ्यो॒ भुव॑नेभ्यो॒ रणं॑ धाः ॥ (१६)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.85.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! वह कार्य तुम्हीं ने किया था. तुम्हीं जन्म लेकर सात शन्रुओं को नष्ट करने वाले बने थे. तुमने अंधकारपूर्ण द्यावा-पृथिवी को प्राप्त किया था. तुमने महान् भवनों के लिए आनंद दिया था. (१६)
EN English Translation
O Indra! That's what you did. You were born to destroy the seven Shanrus. You had received the dark dyava-prithvi. You had fun for the great buildings. (16)