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सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 5

14.3.5

Mantra ID: 14.3.5

सम्राजा या घृतयोनी मित्रश्चोभा वरुणश्च । देवा देवेषु प्रशस्ता ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 14.3.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमानो! मित्र और वरुण ये दोनों देव देवताओं में प्रशंसित हैं. दोनों देव सम्राट्‌ हैं. दोनों देव प्रकाश उत्पन्न करते हैं. (५)

EN English Translation

O hosts! Mitra and Varuna are both admired among the gods. Both gods are emperors. Both gods generate light. (5)

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