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सामवेद

Chapter / Prapathak 14 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 14 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 6

14.3.6

Mantra ID: 14.3.6

ता नः शक्तं पर्थिवस्य महो रायो दिव्यस्य । महि वां क्षत्रं देवेषु ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 14.3.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मित्र! हे वरुण! आप महान एवं देवताओं के बीच सराहनीय हैं. आप पृथ्वीलोक और स्वर्गलोक का वैभव हमें प्राप्त कराने की कृपा कीजिए. (६)

EN English Translation

Hey friend! O Varuna! You are admirable among the great and the gods. Please give us the glory of earth and heaven. (6)

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