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14.5.3
पुनाता दक्षसाधनं यथा शर्धाय वीतये । यथा मित्राय वरुणाय शन्तमम् ॥ (३)
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सामवेद मन्त्र 14.5.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे यजमानो! आप मित्र व वरुण के निमित्त सोम को परिष्कृत करें. आप बल व कुशलता की प्राप्ति और देवताओं को भेंट करने के लिए सोमरस को परिष्कृत कीजिए. (३)
EN English Translation
O hosts! You refine Som for the sake of friend and Varun. Refine someras to gain strength and skill and to offer it to the gods. (3)