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सामवेद

Chapter / Prapathak 16 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 16 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 1

16.7.1

Mantra ID: 16.7.1

यः पावमानीरध्येत्यृषिभिः सम्भृतँ रसम् । सर्वँ स पूतमश्नाति स्वदितं मातरिश्वना ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 16.7.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो यजमान ऋषियों द्वारा संकलित जीवन की उपयोगी बातों में ध्यान लगाता है, पवित्रकारी सूक्तों (मंत्रों, स्तुतियों) का पाठ करता है वह यजमान पवित्र और पोषक अन्नादि रसों का आनंद लेता है. (१)

EN English Translation

The host who meditates on the useful things of life compiled by the sages, recites the holy suktas (mantras, praises), the host enjoys the holy and nutritious anadi rasas. (1)

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