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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 4

17.1.4

Mantra ID: 17.1.4

अग्ने सुखतमे रथे देवाँ ईडित आ वह । असि होता मनुर्हितः ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 17.1.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप देवताओं को साथ ले कर अपने सुखदायी रथ में यज्ञ स्थान तक पधारिए. आप देवताओं को बुलाने वाले व मनुष्यों का हित साधने वाले हैं. (४)

EN English Translation

O agni! You take the gods along and come to the yagna place in your happy chariot. You are the one who calls the gods and serves the interests of human beings. (4)

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