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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 10

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 10

17.2.10

Mantra ID: 17.2.10

अनु हि त्वा सुतँ सोम मदामसि महे समर्यराज्ये । वाजाँ अभि पवमान प्र गाहसे ॥ (१०)

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सामवेद मन्त्र 17.2.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! हम आप के अनुगामी, आप के पुत्र और आप की कृपा से सुखपूर्वक निवास करते हैं. हम आप की कृपा और क्षमता से ही कोई कार्य कर पाते है. (१०)

EN English Translation

O Mon! We live happily by your followers, your sons and by your grace. We are able to do any work only with your grace and ability. (10)

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