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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 7

17.2.7

Mantra ID: 17.2.7

कण्वा इव भृगवः सूर्या इव विश्वमिद्धीतमाशत । इन्द्रँ स्तोमेभिर्महयन्त आयवः प्रियमेधासो अस्वरन् ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 17.2.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

कण्व ऋषि की तरह भृगुओं ने भी इंद्र का साक्षात्कार किया. वे सूर्य की तरह अखिल विश्व में व्याप्त हैं. भृगु इंद्र की महिमा वैसे ही बखान करने लगे, जैसे यजमान (इंद्र की) महिमा का बखान करते हैं. (७)

EN English Translation

Like Kanva Rishi, the bhrigus also interviewed Indra. They are all over the world like the sun. Bhrigu started glorifying Indra just as the hosts extolled the glory (of Indra). (7)

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