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सामवेद

Chapter / Prapathak 17 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 17 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 6

17.2.6

Mantra ID: 17.2.6

उदु त्ये मधुमत्तमा गिर स्तोमास ईरते । सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजन्तो रथा इव ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 17.2.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप वैभवदाता व निरंतर रक्षक हैं. मधुर वाणी वाली स्तुतियां घोड़े वाले रथ के समान हैं, युद्ध में प्रिय लगने वाले अस्त्रशस्त्र (उपकरणों) के समान हैं. (६)

EN English Translation

O Indra! You are a splendor and a constant protector. The praises with sweet speech are like horse chariots, like weapons (instruments) that look dear in war. (6)

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