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सामवेद

Chapter / Prapathak 18 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 18 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 1

18.5.1

Mantra ID: 18.5.1

यमग्ने पृत्सु मर्त्यमवा वाजेषु यं जुनाः । स यन्ता शश्वतीरिषः ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 18.5.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! आप युद्ध में जिन लोगों को लगाते हैं, उन्हें अन्न व बल प्रदान करते हैं और मृत्यु से उन की रक्षा करते हैं. (१)

EN English Translation

O agni! You give food and strength to those you engage in war and protect them from death. (1)

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