Samaveda Quick Jump
Navigate to any Chapter / Prapathak or Mantra
18.5.2
न किरस्य सहन्त्य पर्येता कयस्य चित् । वाजो अस्ति श्रवाय्यः ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
सामवेद मन्त्र 18.5.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! आप ने जिस को बल दिया है, उस बलवान वीर को कोई भी नहीं हरा सकता है. (२)
EN English Translation
O agni! No one can defeat the strong hero whom you have strengthened. (2)