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सामवेद

Chapter / Prapathak 22 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 22 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 6

22.3.6

Mantra ID: 22.3.6

मही मित्रस्य साधथस्तरन्ती पिप्रती ऋतम् । परि यज्ञं नि षेदथुः ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 22.3.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देवियो! हे अंतरिक्षलोक! यजमान आप के सखा हैं. आप यजमान की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. आप यज्ञ को पूर्ण कराते हैं. आप यज्ञ को पूरा सहयोग देते हैं. (६)

EN English Translation

O ladies! O spaceland! The host is your friend. You fulfill the wishes of the host. You complete the yajna. You give full support to the yajna. (6)

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