Popular:
सामवेद

Chapter / Prapathak 22 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 22 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 7

22.3.7

Mantra ID: 22.3.7

अयमु ते समतसि कपोत इव गर्भधिम् । वचस्तच्चिन्न ओहसे ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

सामवेद मन्त्र 22.3.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हमारी स्तुतियां स्नेह से आप के पास उसी तरह पहुंचती हैं, जैसे कबूतर प्रेम से कबूतरी के पास पहुंचता है. (७)

EN English Translation

O Indra! Our praises reach you with affection in the same way as a pigeon reaches the pigeon with love. (7)

卐 HinduText AI