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सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 10

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 10

23.1.10

Mantra ID: 23.1.10

प्र तत्ते अद्य शिपिविष्ट हव्यमर्यः शँसामि वयुनानि विद्वान् । तं त्वा गृणामि तवसमतव्यान्क्षयन्तमस्य रजसः पराके ॥ (१०)

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सामवेद मन्त्र 23.1.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे विष्णु! आप रश्मिवान व आदरणीय हैं. मैं व विद्वान्‌ भी आप की प्रशंसा करते हैं. हम आप के विष्णुलोक से दूर हैं, फिर भी हम अपने लोक से आप की वैसे ही प्रशंसा करते हैं, जैसे कोई छोटा भाई करता है. (१०)

EN English Translation

O Vishnu! You are rashmivan and respected. I and scholars also praise you. We are far from your Vishnulok, yet we praise you from our lok just like a younger brother does. (10)

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