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सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 9

23.1.9

Mantra ID: 23.1.9

किमित्ते विष्णो परिचक्षि नाम प्र यद्ववक्षे शिपिविष्टो अस्मि । मा वर्पो अस्मदप गूह एतद्यदन्यरूपः समिथे बभूथ ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 23.1.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे विष्णु! आप सर्वत्र व्याप्त हैं. आप अपना यह विराट्‌ और व्यापक स्वरूप हम से छिपा कर (गुप्त) न रखिए. आप कितने ही रूप क्यों न धारण कर लें फिर भी आप हमारी रक्षा अवश्य करते हैं. (९)

EN English Translation

O Vishnu! You are everywhere. Don't hide this vast and comprehensive form of yours from us. No matter how many forms you wear, you definitely protect us. (9)

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