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सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 1

23.4.1

Mantra ID: 23.4.1

नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः । अमैरमित्रमर्दय ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 23.4.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! हम बल प्राप्ति के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. आप अमित्रों का मर्दन करने की कृपा कीजिए. (१)

EN English Translation

O agni! We invite you to gain force. Please insult the unfriendly. (1)

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