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सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 4

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 4

24.1.4

Mantra ID: 24.1.4

आ त्वा विशन्त्विन्दवः समुद्रमिव सिन्धवः । न त्वामिन्द्राति रिच्यते ॥ (४)

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सामवेद मन्त्र 24.1.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप के अतिरिक्त और कोई देव श्रेष्ठ नहीं हैं. आप को सोमरस वैसे ही प्राप्त हो, जैसे समुद्र को नदियां प्राप्त होती हैं. (४)

EN English Translation

O Indra! There is no god superior to you. May you receive somers just as the sea receives rivers. (4)

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