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सामवेद

Chapter / Prapathak 24 • Dashati / Sukta 1 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 24 • दशती / सूक्त 1 • मन्त्र 5

24.1.5

Mantra ID: 24.1.5

विव्यक्थ महिना वृषन्भक्षँ सोमस्य जागृवे । य इन्द्र जठरेषु ते ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 24.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप जाग्रत व शक्तिमान हैं. सोम के कारण आप की ख्याति बहुत व्यापक है. आप के जठर (पेट) में पहुंचा हुआ सोम भी प्रशंसा प्राप्त करता है. (५)

EN English Translation

O Indra! You are awake and powerful. Due to Mon, your reputation is very wide. The SOM reached in your stomach also receives praise. (5)

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