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सामवेद

Chapter / Prapathak 4 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 4 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 8

4.2.8

Mantra ID: 4.2.8

वयश्चित्ते पतत्रिणो द्विपाच्चतुष्पादर्जुनि । उषः प्रारन्नृतूँरनु दिवो अन्तेभ्यस्परि ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 4.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे उषा! आप प्रकाशवाली हैं. आप जब उदय हो जाती हैं तो अंतरिक्ष में पक्षी दूरदूर तक उड़ते हैं. पशु भी विचरण करते हैं. मनुष्य भी गतिशील हो जाते हैं. (८)

EN English Translation

O Usha! You are light. When you rise, birds fly far and wide in space. Animals also roam. Humans also become dynamic. (8)

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