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सामवेद

Chapter / Prapathak 6 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 2

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 6 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 2

6.4.2

Mantra ID: 6.4.2

वसन्त इन्नु रन्त्यो ग्रीष्म इन्नु रन्त्यः । वर्षाण्यनु शरदो हेमन्तः शिशिर इन्नु रन्त्यः ॥ (२)

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सामवेद मन्त्र 6.4.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वसंत ऋतु लुभावनी है. ग्रीष्म ऋतु लुभावनी है. वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर ऋतुएं भी लुभावनी हैं. (२)

EN English Translation

Spring is breathtaking. Summer is breathtaking. The rainy, autumn, hemant and shishir seasons are also breathtaking. (2)

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