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सामवेद

Chapter / Prapathak 6 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 6 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 3

6.4.3

Mantra ID: 6.4.3

सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात् । स भूमिँ सर्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम् ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 6.4.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पूर्ण पुरुष हजारों सिरों वाला है. वह हजारों आंखों वाला है, हजारों पैरों वाला है. वह सारे ब्रह्मांड को घेर सकने में समर्थ है. फिर भी वह बाकी रहता है. (३)

EN English Translation

The full man is with thousands of heads. He is thousands of eyes, thousands of feet. He is capable of encircling the entire universe. Yet he remains. (3)

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