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सामवेद

Chapter / Prapathak 7 • Dashati / Sukta 4 • Mantra 9

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 7 • दशती / सूक्त 4 • मन्त्र 9

7.4.9

Mantra ID: 7.4.9

न यं दुध्रा वरन्ते न स्थिरा मुरो मदेषु शिप्रमन्धसः । य आदृत्या शशमानाय सुन्वते दाता जरित्र उक्थ्यम् ॥ (९)

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सामवेद मन्त्र 7.4.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र सुंदर ठुड्डी वाले हैं. शक्तिशाली राक्षस व मरणधर्मा मनुष्य (कितने ही शक्तिशाली हों) भी उन्हें नहीं हरा सकते. वे सोमरस के आनंद में सोम यज्ञ करने वालों को प्रचुर यशदायी धन देते हैं. हम मन से उन की स्तुति करते हैं. (९)

EN English Translation

Indra is beautiful chin. Even powerful demons and mortal humans (however powerful) cannot defeat them. They give abundant wealth to those who perform Soma Yagya in the joy of Somras. We praise them wholeheartedly. (9)

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