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सामवेद

Chapter / Prapathak 7 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 1

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 7 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 1

7.5.1

Mantra ID: 7.5.1

स्वादिष्ठया मदिष्ठया पवस्व सोम धारया । इन्द्राय पातवे सुतः ॥ (१)

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सामवेद मन्त्र 7.5.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र के पीने के लिए स्वादिष्ट और मीठा सोमरस तैयार किया गया है. वह सोमरस अपनी पूर्ण मददायी धाराओं से इंद्र के लिए झरे. (१)

EN English Translation

Delicious and sweet somers have been prepared for Indra's drinking. That Someras flew to Indra with his full-fledged streams. (1)

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