Asked Aug 28, 2026 at 03:12 AM • Dharma Shastra
वर्ण व्यवस्था और जन्म आधारित जाति में क्या मौलिक अंतर है? शास्त्रों में इसका क्या स्वरूप मिलता है?
अक्सर आधुनिक विमर्श में 'वर्ण' और 'जाति' को एक ही समझ लिया जाता है। ऋग्वेद के पुरुष सूक्त और श्रीमद्भगवद्गीता के चौथे अध्याय के अनुसार वर्ण का निर्धारण किस आधार पर बताया गया है और कालांतर में यह जन्मगत कैसे हुआ?
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